फरीदाबाद में आयोजित 39वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में इस वर्ष पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल मिस्र अपनी प्राचीन सभ्यता और आधुनिक हस्तशिल्प के अनूठे संगम से दर्शकों को खासा आकर्षित कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय पवेलियन में लगाए गए विभिन्न देशों के स्टॉल्स के बीच मिस्र की स्टॉल्स खास पहचान बना रही हैं, जहां पारंपरिक कला के साथ-साथ आधुनिक उपयोग की वस्तुएं भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही हैं।
मिस्र की स्टॉल्स पर सजी कलाकृतियां न केवल देखने में सुंदर हैं, बल्कि वे वहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक भी पेश करती हैं। मेले में आने वाले पर्यटक इन स्टॉल्स पर रुककर न सिर्फ खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि मिस्र की कला, कारीगरी और परंपराओं के बारे में भी जानकारी हासिल कर रहे हैं। खास बात यह है कि यहां शिल्पकार खुद अपनी कला की प्रक्रिया के बारे में बता रहे हैं, जिससे दर्शकों का अनुभव और भी खास बन रहा है।
जूट के हैंडमेड बैग्स बने आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय पवेलियन में मिस्र की स्टॉल पर जूट से तैयार किए गए हैंडमेड बैग्स पर्यटकों, खासकर महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। स्टॉल संचालक अमील ने बताया कि ये बैग्स पूरी तरह हाथ से बनाए जाते हैं और इनकी डिजाइनिंग में पारंपरिक मिस्र की कला के साथ आधुनिक फैशन का भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि इन बैग्स की कीमत उनकी गुणवत्ता और डिजाइन के अनुसार लगभग 3 हजार से 5 हजार रुपये के बीच रखी गई है।
पर्यटकों का कहना है कि ये बैग्स न केवल मजबूत और टिकाऊ हैं, बल्कि दिखने में भी बेहद आकर्षक हैं। कई लोग इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में खरीद रहे हैं, तो कई लोग रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी इन्हें पसंद कर रहे हैं।
सिरेमिक कला ने भी बटोरी तारीफ
इसी स्टॉल पर शिल्पकार मुहम्मद अली मोहम्मद द्वारा तैयार की गई मिस्र की प्रसिद्ध सिरेमिक कला भी दर्शकों को खूब लुभा रही है। यहां कप, प्लेट और अन्य बर्तनों का शानदार संग्रह प्रदर्शित किया गया है, जिन पर की गई बारीक नक्काशी और विशिष्ट रंग पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इन बर्तनों में मिस्र की पारंपरिक कला शैली के साथ आधुनिक फिनिश का सुंदर मेल देखने को मिल रहा है।
पर्यटक इन सिरेमिक उत्पादों की कारीगरी की खास तारीफ कर रहे हैं और कई लोग इन्हें अपने घर की सजावट या उपहार के रूप में खरीद रहे हैं।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच
आयोजकों का कहना है कि सूरजकुंड शिल्प मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह विभिन्न देशों की संस्कृति और कला को करीब से जानने का एक बड़ा मंच भी है। पार्टनर कंट्री के रूप में मिस्र की भागीदारी ने इस मेले को और भी खास बना दिया है।
कुल मिलाकर, अंतर्राष्ट्रीय पवेलियन में मिस्र की स्टॉल्स मेले की शान बढ़ा रही हैं और यह साबित कर रही हैं कि पारंपरिक हस्तशिल्प आज भी आधुनिक दौर में लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।


