इस बार आयोजित मेले में पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल मिस्र की कला और संस्कृति पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गई है। मेले में आने वाले पर्यटक न केवल यहां खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि मिस्र के स्टॉल्स पर जाकर वहां की पारंपरिक कला, शिल्प निर्माण की प्रक्रिया और सदियों पुरानी परंपराओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी हासिल कर रहे हैं। यह अनुभव मेले को केवल एक व्यापारिक आयोजन ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच भी बना रहा है।
मिस्र के शिल्पकारों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स पर लकड़ी की नक्काशी, हाथ से बने आभूषण, सजावटी वस्तुएं, कपड़े और कलात्मक सजावट की कई अनोखी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। इन वस्तुओं में मिस्र की प्राचीन सभ्यता की झलक साफ दिखाई देती है। पर्यटक इन कलाकृतियों को नजदीक से देखकर न केवल उनकी सुंदरता की सराहना कर रहे हैं, बल्कि यह भी जान रहे हैं कि इन्हें तैयार करने में कितनी मेहनत, धैर्य और कौशल लगता है।
मेले में मौजूद शिल्पकार खुद आगंतुकों को अपनी कला की बारीकियां समझा रहे हैं। वे बता रहे हैं कि किस तरह पीढ़ी दर पीढ़ी यह हुनर आगे बढ़ता आया है और आज भी आधुनिक दौर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। कई शिल्पकार मौके पर ही अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे दर्शकों को यह देखने का अवसर मिल रहा है कि एक साधारण सी सामग्री कैसे एक खूबसूरत कलाकृति में बदल जाती है।
पार्टनर कंट्री के रूप में मिस्र इस बार मेले की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में से एक है। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल व्यापार को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि विभिन्न देशों की संस्कृति और कला को एक-दूसरे के करीब लाना भी है। इसी वजह से मिस्र की पारंपरिक कला को इस मंच पर विशेष स्थान दिया गया है।
पर्यटकों में खास तौर पर युवा वर्ग और कला प्रेमियों में इन स्टॉल्स को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग यहां से स्मृति-चिह्न के रूप में मिस्र की कलाकृतियां खरीद रहे हैं, तो कई लोग सिर्फ इस अनोखी संस्कृति को करीब से समझने के लिए समय बिता रहे हैं। बच्चों और छात्रों के लिए यह अनुभव शिक्षाप्रद साबित हो रहा है, क्योंकि उन्हें दुनिया की एक प्राचीन सभ्यता की कला और परंपराओं को जानने का मौका मिल रहा है।
शिल्पकारों का कहना है कि भारत जैसे बड़े और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में अपनी कला को प्रदर्शित करना उनके लिए गर्व की बात है। इससे न केवल उन्हें अपनी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का अवसर मिल रहा है, बल्कि अलग-अलग देशों के लोगों से संवाद भी स्थापित हो रहा है।
कुल मिलाकर, मेले में मिस्र की भागीदारी ने आयोजन को और भी रंगीन और खास बना दिया है। यह साबित करता है कि पारंपरिक कला चाहे किसी भी देश की हो, अगर उसे सही मंच मिले तो वह आज के आधुनिक दौर में भी लोगों के दिलों को छू सकती है और अपनी वैश्विक पहचान बना सकती है।


