फरीदाबाद के प्रसिद्ध सूरजकुंड में ‘लोकल फॉर ग्लोबल–आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ थीम के साथ आयोजित 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में इस बार देश-विदेश से आए शिल्पकार अपनी पारंपरिक और विशिष्ट कलाओं का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश से आए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार शिंदे श्रीरामुलु की दुर्लभ एवं पारंपरिक ‘चमड़े की चित्रकारी’ कला पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
शिंदे श्रीरामुलु बताते हैं कि चमड़े की चित्रकारी एक प्राचीन और पारंपरिक कला विधा है, जिसमें प्राकृतिक (ऑर्गेनिक) रंगों के माध्यम से चित्रांकन किया जाता है। इस कला की खासियत यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले रंग पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं, जिससे न केवल कलाकृति की सुंदरता बढ़ती है, बल्कि इसकी टिकाऊपन और पारंपरिक पहचान भी बनी रहती है। इस कला से निर्मित उत्पाद मुख्य रूप से होम डेकोर के लिए तैयार किए जाते हैं, जिनमें लैम्प शेड, डोर हैंगिंग्स, वॉल पेंटिंग्स और अन्य कई सजावटी वस्तुएं शामिल हैं।
श्रीरामुलु को उनकी उत्कृष्ट कला के लिए वर्ष 2006 में तत्कालीन माननीय राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, उन्हें सूरजकुंड मेला प्राधिकरण की ओर से ‘कलानिधि पुरस्कार’, ‘कलामणि पुरस्कार’ और ‘कला श्री पुरस्कार’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया है। यह उनकी कला की गुणवत्ता और समर्पण का प्रमाण है। उल्लेखनीय है कि श्रीरामुलु वर्ष 2006 से लगातार सूरजकुंड मेले के प्रत्येक संस्करण में भाग ले रहे हैं और नियमित रूप से अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए एक बेहतरीन और प्रभावी मंच है। यहां देश-विदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से लाखों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे उनकी कला को व्यापक पहचान मिलती है और उनके उत्पादों को अच्छा व्यावसायिक प्रतिसाद भी मिलता है। यही कारण है कि वे हर साल इस मेले का हिस्सा बनने को उत्सुक रहते हैं।
इस बार मेले में उनकी स्टॉल संख्या 1228 पर प्रदर्शित चर्म चित्रकारी कला और उससे निर्मित उत्पाद दर्शकों को खास तौर पर आकर्षित कर रहे हैं। लोग न केवल इन कलाकृतियों को निहार रहे हैं, बल्कि उन्हें खरीदने में भी गहरी रुचि दिखा रहे हैं। कई पर्यटक इस कला की बारीकियों, रंगों की सादगी और डिज़ाइन की अनूठी शैली से प्रभावित नजर आए।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि पारंपरिक शिल्प और लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन का एक सशक्त मंच भी है। यहां विभिन्न राज्यों और देशों की सांस्कृतिक विरासत एक ही स्थान पर देखने को मिलती है। शिंदे श्रीरामुलु जैसे कलाकार इस मेले की आत्मा को और भी समृद्ध बनाते हैं और यह संदेश देते हैं कि पारंपरिक कलाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और आकर्षक हैं, जितनी पहले हुआ करती थीं।


