हरियाणा सरकार द्वारा शिल्पकारों और हस्तशिल्प कलाकारों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी कला को नई पहचान मिल रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला आज शिल्पकारों के लिए एक बड़ा मंच बन चुका है, जहां देश-विदेश से आए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुंचा रहे हैं।
सूरजकुंड मेले में भाग ले रही शिल्पकार नीतू ने हरियाणा सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार द्वारा उन्हें इस तरह का अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे उनकी कला को नई दिशा और पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेले में अपनी कला का प्रदर्शन करना उनके लिए गर्व की बात है और यह अनुभव उन्हें आगे और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करता है।
नीतू ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से न केवल कलाकारों को अपने हुनर को दिखाने का मौका मिलता है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूती मिलती है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और कला प्रेमी शिल्पकारों के उत्पादों में रुचि दिखाते हैं, जिससे उनकी बिक्री बढ़ती है और उनके परिवार की आजीविका भी मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि पहले स्थानीय स्तर पर ही उनकी कला सीमित रह जाती थी, लेकिन अब सूरजकुंड जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचकर उनकी कला को व्यापक पहचान मिल रही है।
हरियाणा सरकार का मानना है कि शिल्प और हस्तकला हमारी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं और इन्हें संरक्षित व प्रोत्साहित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सरकार द्वारा समय-समय पर विभिन्न मेले, प्रदर्शनी और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि शिल्पकारों को न केवल मंच मिले, बल्कि वे अपने हुनर को और निखार सकें।
अधिकारियों के अनुसार, सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां विभिन्न राज्यों के साथ-साथ कई देशों से आए कलाकार अपनी पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और लोक संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलता है।
सरकार के इन प्रयासों से प्रदेश के शिल्पकारों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। वे अब अपनी कला को केवल शौक या परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता के साधन के रूप में भी देख रहे हैं। इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी मजबूती मिल रही है।
नीतू जैसी कई शिल्पकारों का मानना है कि यदि इसी तरह सरकार का सहयोग मिलता रहा, तो आने वाले समय में भारतीय हस्तशिल्प न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बनाएगा और हजारों कारीगरों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आएगा।


