पंजाब सरकार ने शिक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 271 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने जालंधर में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में इस योजना की औपचारिक शुरुआत की, जिसके तहत 2.7 लाख से अधिक दलित छात्रों को वजीफा प्रदान किया गया। यह पहल राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी मिशन ‘रंगला पंजाब’ का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि शिक्षा ही समाज में समानता और आत्मनिर्भरता की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल छात्रवृत्ति देना नहीं, बल्कि छात्रों को आगे बढ़ने, अपने सपनों को साकार करने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि कोई भी छात्र केवल आर्थिक अभाव के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे, यह सरकार की प्राथमिकता है।
सीएम मान ने बताया कि पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कॉलेज, यूनिवर्सिटी और तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों को सीधा लाभ पहुंचाया जा रहा है। राशि सीधे छात्रों के खातों में ट्रांसफर की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की बाधा या देरी न हो। उन्होंने इसे “सम्मान के साथ सहायता” की नीति बताया।
सरकार के अनुसार, इस योजना से न केवल उच्च शिक्षा में दलित छात्रों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि ड्रॉपआउट दर में भी कमी आएगी। पिछले वर्षों में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। अब छात्रवृत्ति मिलने से वे बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मिशन ‘रंगला पंजाब’ का लक्ष्य एक ऐसा राज्य बनाना है, जहां हर वर्ग को समान अवसर मिलें। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकार लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा।
कार्यक्रम में मौजूद छात्रों और अभिभावकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। कई छात्रों ने कहा कि छात्रवृत्ति मिलने से उनकी फीस, किताबों और रहने की व्यवस्था में बड़ी राहत मिलेगी। अभिभावकों का मानना है कि यह योजना उनके बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में मददगार साबित होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को एक साथ छात्रवृत्ति देना पंजाब में सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा, बल्कि राज्य को कुशल और आत्मनिर्भर युवा शक्ति भी मिलेगी।
कुल मिलाकर, 271 करोड़ रुपये की इस छात्रवृत्ति पहल को पंजाब में शिक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है। मिशन ‘रंगला पंजाब’ के तहत यह कदम राज्य के हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।


