पंजाब में शिक्षा सुधारों की दिशा में शुरू की गई “शिक्षा क्रांति” अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। राज्य सरकार द्वारा स्थापित किए गए स्कूल ऑफ एमिनेंस और रेजिडेंशियल स्कूलों में दाखिले के लिए इस वर्ष अभूतपूर्व रुचि देखने को मिली है। उपलब्ध लगभग 20 हजार सीटों के मुकाबले 2 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते भरोसे और प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह पहली बार है जब सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए इतनी बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह रुझान साफ संकेत देता है कि अभिभावक अब सरकारी स्कूलों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मजबूत विकल्प मानने लगे हैं। आधुनिक सुविधाएं, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और अनुभवी शिक्षकों की उपलब्धता ने इन स्कूलों की छवि को पूरी तरह बदल दिया है।
स्कूल ऑफ एमिनेंस की परिकल्पना प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उन्नत शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, करियर काउंसलिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष तैयारी जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। वहीं, रेजिडेंशियल स्कूलों में दूर-दराज़ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आवास, भोजन और पढ़ाई की समुचित व्यवस्था की गई है, जिससे वे बिना किसी बाधा के शिक्षा प्राप्त कर सकें।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर वर्षों से चली आ रही नकारात्मक सोच में भी बदलाव आएगा। बड़ी संख्या में आवेदन यह दर्शाते हैं कि छात्रों और अभिभावकों को इन स्कूलों की चयन प्रक्रिया और पाठ्यक्रम पर भरोसा है।
हालांकि, सीटों की संख्या सीमित होने के कारण चयन प्रक्रिया को लेकर प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी रहने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रवेश पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए प्रवेश परीक्षा और अन्य मापदंड तय किए गए हैं, ताकि योग्य और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर मिल सके।
राज्य सरकार का कहना है कि भविष्य में स्कूल ऑफ एमिनेंस और रेजिडेंशियल स्कूलों की संख्या बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में और अधिक जिलों में ऐसे स्कूल खोले जाएंगे, जिससे ज्यादा से ज्यादा छात्रों को लाभ मिल सके।
कुल मिलाकर, 2 लाख से अधिक आवेदनों का आंकड़ा यह साबित करता है कि पंजाब में शिक्षा को लेकर एक सकारात्मक बदलाव की लहर चल पड़ी है। यह “शिक्षा क्रांति” न केवल वर्तमान पीढ़ी को बेहतर अवसर दे रही है, बल्कि राज्य के भविष्य को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है।


