गुरुग्राम स्थित युद्ध स्मारक पर आज देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर भारत माता के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद जवानों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को नमन किया गया। कार्यक्रम का वातावरण देशभक्ति, गर्व और भावनात्मक सम्मान से ओतप्रोत रहा।
श्रद्धांजलि समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जिन वीर योद्धाओं ने राष्ट्र की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया, उनका साहस और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि शहीदों की शहादत केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज घटनाएं नहीं हैं, बल्कि वे हमारी पराक्रमी परंपरा और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत प्रतीक हैं।
युद्ध स्मारक पर उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान देशभक्ति के विचारों और राष्ट्रप्रेम से जुड़े संदेशों ने सभी को भावुक कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि आज जिन शांत और सुरक्षित परिस्थितियों में हम जीवन व्यतीत कर पा रहे हैं, उसके पीछे हमारे सैनिकों की सतत निगरानी, संघर्ष और बलिदान छिपा हुआ है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल और सुरक्षा एजेंसियों के जवान कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। चाहे दुर्गम पहाड़ हों, घने जंगल हों या सीमावर्ती क्षेत्र—हर स्थान पर हमारे जवान राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। उनका साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान यह संकल्प भी लिया गया कि शहीदों के बलिदान से प्रेरणा लेकर प्रत्येक नागरिक अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करेगा। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन, शिक्षा और विकास के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करके भी की जा सकती है। जब देश का हर नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होगा, तभी शहीदों का सपना साकार हो सकेगा।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि हमें एकजुट होकर हर चुनौती का साहस और संकल्प के साथ सामना करना चाहिए। शहीदों का बलिदान हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और उसके सम्मान व सुरक्षा के लिए किया गया हर प्रयास सार्थक होता है।
गुरुग्राम के युद्ध स्मारक पर आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह न केवल शहीदों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक रहा, बल्कि यह सभी नागरिकों को राष्ट्रभक्ति, सेवा और समर्पण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता रहा।


