चंडीगढ़ में आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप सतलुज–यमुना लिंक (SYL) नहर के संवेदनशील और लंबे समय से लंबित मुद्दे पर हरियाणा और पंजाब के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में हरियाणा की ओर से मुख्यमंत्री और पंजाब की ओर से आदरणीय मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान जी ने सहभागिता की। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच यह चर्चा सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें आपसी संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने पर जोर दिया गया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत SYL नहर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करना था। चर्चा के दौरान दोनों राज्यों के हितों, जल संसाधनों की वर्तमान स्थिति, किसानों की जरूरतों और भविष्य की जल मांग को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के आधार पर संवाद किया गया। अधिकारियों ने अब तक की कानूनी स्थिति और तकनीकी पक्षों की जानकारी भी साझा की।
हरियाणा सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि राज्य संविधान और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण सम्मान करता है तथा अपने न्यायोचित जल अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध है। साथ ही यह भी दोहराया गया कि SYL नहर हरियाणा के किसानों और प्रदेश की कृषि व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार संवाद और सहयोग के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है।
वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान जी ने कहा कि पंजाब पहले से ही सीमित जल संसाधनों और गिरते भूजल स्तर की चुनौती से जूझ रहा है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी निर्णय में पंजाब के किसानों, पर्यावरणीय संतुलन और राज्य की जल सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने भी आपसी सहमति और संवैधानिक ढांचे के भीतर समाधान खोजने की बात कही।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि टकराव के बजाय संवाद ही इस जटिल मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने का मार्ग है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे तकनीकी और कानूनी तथ्यों के आधार पर विकल्पों पर काम करें और आगे की प्रक्रिया के लिए आपसी समन्वय बनाए रखें।
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि चंडीगढ़ में हुई यह बैठक SYL विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल है। यदि भविष्य में इसी तरह संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही, तो दशकों पुराने इस विवाद को सुलझाने की दिशा में ठोस प्रगति संभव है।
बैठक के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में हरियाणा और पंजाब मिलकर ऐसा रास्ता निकालेंगे, जो दोनों राज्यों के हितों, किसानों की जरूरतों और संघीय सहयोग की भावना के अनुरूप हो।


