देशभर में आज राष्ट्रीय बालिका दिवस हर्षोल्लास और सकारात्मक संकल्पों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा बालिकाओं के अधिकार, सम्मान, शिक्षा और सशक्तिकरण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रीय बालिका दिवस का उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना, लैंगिक समानता को सुदृढ़ करना और बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित एवं आत्मनिर्भर भविष्य प्रदान करना है।
बालिकाएं केवल परिवार की शान ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार और विकास की धुरी हैं। वे समाज के नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद आज भी कई स्थानों पर बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसरों के मामले में असमानताओं का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस ऐसे ही सामाजिक मुद्दों पर चिंतन और समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास का संदेश देता है।
सरकार द्वारा बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए कई प्रभावी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने समाज में बालिका शिक्षा और संरक्षण को लेकर नई चेतना जगाई है। इसके साथ ही सुकन्या समृद्धि योजना, बालिका छात्रवृत्ति योजनाएं, मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जैसी पहलें बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बेटी केवल संसाधनों के अभाव में अपने सपनों से वंचित न रहे।
शिक्षा बालिकाओं के सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार है। शिक्षित बेटी न केवल अपने परिवार का भविष्य संवारती है, बल्कि समाज और देश के विकास में भी निर्णायक भूमिका निभाती है। आज देश की बेटियां विज्ञान, खेल, प्रशासन, रक्षा, राजनीति और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि जब बेटियों को समान अवसर और विश्वास मिलता है, तो वे असाधारण उपलब्धियां हासिल करती हैं।
राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा रैलियां, संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बाल विवाह, भ्रूण हत्या, लैंगिक भेदभाव जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ संदेश दिया गया और बेटियों के सम्मान व सुरक्षा पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बालिकाओं को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने की स्वतंत्रता और आत्मविश्वास भी देना समय की मांग है।
आज आवश्यकता है कि समाज के प्रत्येक वर्ग—परिवार, शिक्षा संस्थान, प्रशासन और समुदाय—मिलकर बेटियों के लिए सुरक्षित और समान अवसरों वाला वातावरण तैयार करे। बेटियों को आगे बढ़ने से रोकने वाली रूढ़ियों को तोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सशक्त बेटी से ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है। जब हर बेटी को सम्मान, शिक्षा और अवसर मिलेंगे, तभी राष्ट्र प्रगति के पथ पर और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगा।


