भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जिन वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का संकल्प लिया, उनमें काकोरी एक्शन के अमर नायक ठाकुर रोशन सिंह जी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। उनकी जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जा रहा है। यह अवसर न केवल उनके अद्वितीय साहस और बलिदान को स्मरण करने का है, बल्कि नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का भी है।
ठाकुर रोशन सिंह जी का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ, लेकिन उनके विचार और संकल्प असाधारण थे। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की प्रखर भावना विद्यमान थी। अंग्रेजी शासन द्वारा भारतीयों पर किए जा रहे अत्याचारों ने उनके मन में विद्रोह की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि अपना जीवन उद्देश्य बना लिया।
काकोरी कांड भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1925 में घटित इस ऐतिहासिक घटना ने ब्रिटिश शासन की नींव को हिला दिया था। ठाकुर रोशन सिंह जी ने इस साहसिक क्रांतिकारी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस घटना का उद्देश्य न केवल ब्रिटिश सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर करना था, बल्कि भारतीय युवाओं में क्रांति और स्वाभिमान की भावना को जागृत करना भी था। काकोरी एक्शन के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने क्रांतिकारियों पर भीषण दमनचक्र चलाया, लेकिन रोशन सिंह जी जैसे वीरों का साहस डगमगाया नहीं।
गिरफ्तारी के बाद ठाकुर रोशन सिंह जी पर अमानवीय अत्याचार किए गए। जेल में उन्हें कठोर यातनाएं दी गईं, परंतु उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। न्यायालय में उन्होंने निर्भीक होकर अपने विचार रखे और देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए अपने कार्यों पर गर्व व्यक्त किया। अंततः ब्रिटिश सरकार ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई। 19 दिसंबर 1927 को उन्होंने हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
ठाकुर रोशन सिंह जी का बलिदान केवल उस समय की पीढ़ी के लिए ही नहीं, बल्कि आज और आने वाले कल के लिए भी प्रेरणास्रोत है। उनकी मातृभूमि के प्रति निष्ठा, त्याग और अदम्य साहस हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है। स्वतंत्र भारत में सांस लेते हुए हम जिन अधिकारों और स्वतंत्रताओं का उपभोग कर रहे हैं, उनकी नींव ऐसे ही अमर शहीदों के बलिदान पर टिकी है।
आज उनकी जयंती पर देश उन्हें कोटि-कोटि नमन करता है। यह हमारा दायित्व है कि हम उनके सपनों के भारत के निर्माण में योगदान दें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें। ठाकुर रोशन सिंह जी जैसे महान क्रांतिकारी सदैव हमारे हृदयों में जीवित रहेंगे और देशभक्ति की लौ को प्रज्ज्वलित करते रहेंगे।


