पूर्वोत्तर भारत की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध परंपराओं के संगम वाले मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा राज्यों के स्थापना दिवस के अवसर पर देशभर में उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। इस पावन अवसर पर इन तीनों राज्यों के समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। प्रकृति की गोद में बसे ये राज्य न केवल अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाने जाते हैं, बल्कि राष्ट्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मणिपुर अपनी लोककला, नृत्य और खेल संस्कृति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मणिपुरी नृत्य, जो भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, विश्वभर में राज्य की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसके साथ ही, खेलों के क्षेत्र में मणिपुर ने देश को अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन किया है। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण लोकटक झील और ऐतिहासिक कांगला किला मणिपुर की पहचान को और भी सशक्त बनाते हैं।
मेघालय, जिसे “बादलों का घर” कहा जाता है, अपनी हरियाली, झरनों और स्वच्छ पर्यावरण के लिए जाना जाता है। चेरापूंजी और मौसिनराम जैसी विश्वविख्यात स्थानों ने मेघालय को वैश्विक पहचान दिलाई है। यहां की खासी, जयंतिया और गारो जनजातियों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। राज्य ने शिक्षा, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे यह सतत विकास का आदर्श बनता जा रहा है।
त्रिपुरा अपनी ऐतिहासिक विरासत, जनजातीय संस्कृति और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है। उज्जयंत पैलेस, नीरमहल और त्रिपुरासुंदरी मंदिर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल राज्य की गौरवशाली पहचान को दर्शाते हैं। त्रिपुरा ने बांस उद्योग, हस्तशिल्प और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाओं को साकार किया है। हाल के वर्षों में बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार से राज्य विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।
स्थापना दिवस के अवसर पर इन राज्यों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनकल्याणकारी गतिविधियां और उत्सव आयोजित किए गए। स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इन आयोजनों को और भी विशेष बना दिया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा की विविधता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है, जो देश की एकता और अखंडता को मजबूत करती है।
इस अवसर पर ईश्वर से प्रार्थना की गई कि ये तीनों राज्य निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहें और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास के नए आयाम स्थापित करें। पूर्वोत्तर भारत के ये अनमोल राज्य आने वाले समय में भी देश के गौरव को बढ़ाते हुए समावेशी और संतुलित विकास का प्रतीक बने रहें, यही सभी की शुभकामना है।


