पंजाब में वर्षों से कुत्ते के काटने की घटनाएं केवल एक सामान्य चोट नहीं, बल्कि एक गंभीर जन-स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई थीं। हर साल करीब तीन लाख मामले सामने आने से हजारों परिवारों पर रेबीज़ का खतरा मंडराता रहता था। यह बीमारी इलाज न मिलने पर शत-प्रतिशत घातक होती है, जबकि समय पर टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। बावजूद इसके, पहले राज्य में एंटी-रेबीज़ वैक्सीन (एआरवी) की सुविधा सीमित संख्या में ही उपलब्ध थी, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में अब इस गंभीर समस्या का व्यावहारिक और प्रभावी समाधान किया गया है। राज्यभर में स्थापित 881 आम आदमी क्लीनिकों के नेटवर्क को मजबूत बनाते हुए, पंजाब सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर ही एंटी-रेबीज़ टीकाकरण की सुविधा सुनिश्चित कर दी है। इससे न केवल इलाज तक पहुंच आसान हुई है, बल्कि रेबीज़ से होने वाली संभावित मौतों के खतरे में भी बड़ी कमी आई है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच के तहत सरकार का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक के घर के पास, समय पर और बिना आर्थिक बोझ के उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि आम आदमी क्लीनिकों में एआरवी सेवाओं को शामिल करना जन-स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि अब कुत्ते के काटने के शिकार लोगों को इलाज के लिए दूर के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
आम आदमी क्लीनिक, जो पहले ही पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बन चुके हैं, प्रतिदिन लगभग 70 हजार मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं। अब इन क्लीनिकों में कुत्ते के काटने का इलाज कुछ ही मिनटों में शुरू हो जाता है और पूरी पांच खुराकों वाला टीकाकरण कोर्स मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे मरीजों को न तो लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है और न ही रोज़गार या मजदूरी का नुकसान उठाना पड़ता है।
पिछले चार महीनों के आंकड़े बताते हैं कि हर महीने औसतन 1,500 से अधिक पीड़ित आम आदमी क्लीनिकों में रिपोर्ट कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीज अब पूरा टीकाकरण कोर्स पूरा कर रहे हैं, जो पहले की व्यवस्था में अक्सर अधूरा रह जाता था। इससे रेबीज़ से होने वाली मौतों के जोखिम में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
इस पहल से मरीजों का अनुभव भी पूरी तरह बदल गया है। पहले जो इलाज तनावपूर्ण, खर्चीला और अनिश्चित हुआ करता था, वह अब व्यवस्थित, सुरक्षित और भरोसेमंद बन गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों, बच्चों, बुजुर्गों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह बदलाव जीवनरक्षक साबित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासन और जनहित को प्राथमिकता देने का उदाहरण है। आम आदमी क्लीनिकों के माध्यम से एंटी-रेबीज़ टीकाकरण को सुलभ बनाकर पंजाब सरकार ने यह साबित किया है कि मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था और निर्णायक नेतृत्व से गंभीर जन-स्वास्थ्य जोखिमों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।


