श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब)। पंजाब के पावन तीर्थ स्थल श्री मुक्तसर साहिब में आयोजित ऐतिहासिक “माघी मेला” कार्यक्रम में आज श्रद्धा और उत्साह के साथ सहभागिता की गई। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं अपने परिवारजनों को लोहड़ी और मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। माघी मेले का यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक माना जाता है, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि पंजाब और हरियाणा केवल भौगोलिक रूप से पड़ोसी राज्य नहीं हैं, बल्कि दोनों का रिश्ता आपसी प्रेम, भाईचारे और साझा संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। दोनों राज्यों की परंपराएं, लोक संस्कृति, खानपान और पर्व-त्योहार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह रिश्ता खून और मिट्टी का है, जो सदियों से आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित रहा है।
वक्तव्य में यह भी कहा गया कि हरियाणा के लोगों के मन में पंजाब के प्रति अपार स्नेह, सम्मान और आत्मीयता है। माघी मेला जैसे आयोजन इस भावना को और मजबूत करते हैं। ये केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता के जीवंत उदाहरण हैं। ऐसे अवसरों पर विभिन्न राज्यों और समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र होकर आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं।
माघी मेला सिख इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह मेला गुरु गोबिंद सिंह जी और चालीस मुक्तों (चाली मुक्ते) की शहादत की स्मृति से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर श्रद्धालु सरोवर में स्नान कर गुरु साहिबानों के चरणों में शीश नवाते हैं और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए अरदास करते हैं। कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारों में कीर्तन, लंगर और सेवा की परंपरा भी श्रद्धा भाव से निभाई गई।
इस अवसर पर गुरु साहिबानों से प्रार्थना की गई कि उनकी कृपा से देश और प्रदेश में सदैव शांति, समृद्धि और भाईचारा बना रहे। साथ ही यह कामना भी की गई कि पंजाब और हरियाणा की यह सांस्कृतिक एकता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। वक्तव्य में कहा गया कि आज के समय में जब समाज को एकता और सद्भाव की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
माघी मेले के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और धार्मिक वातावरण ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देकर सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया।
कुल मिलाकर, श्री मुक्तसर साहिब में आयोजित माघी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि पंजाब-हरियाणा सहित पूरे देश के लिए एकता, भाईचारे और साझा संस्कृति का मजबूत संदेश भी लेकर आया। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखते हुए समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।


