हरियाणा में यमुना नदी को प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में फरीदाबाद, पलवल और नूंह जिलों में पर्यावरणीय नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक, वायु और जल प्रदूषण पर नियंत्रण, सीवेज प्रबंधन को सुदृढ़ करना तथा प्राकृतिक संसाधनों की बहाली को लेकर ठोस रणनीति तैयार करना रहा।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारणों पर विस्तृत चर्चा की गई। सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन और पर्यावरण संतुलन से जुड़ी हुई है। इसके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने फरीदाबाद, पलवल और नूंह जैसे औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए।
औद्योगिक प्रदूषण को लेकर बैठक में विशेष चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और बिना शोधन के अपशिष्ट जल छोड़ने वाले उद्योगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण गतिविधियों, ईंट-भट्टों और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर भी कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
सीवेज प्रबंधन को यमुना प्रदूषण का एक बड़ा कारण बताते हुए बैठक में शहरी निकायों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कार्यक्षमता बढ़ाने, नई परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और बिना उपचारित सीवेज को नदी में जाने से रोकने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि सीवेज नेटवर्क की नियमित सफाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए।
प्राकृतिक संसाधनों की बहाली के संदर्भ में बैठक में यमुना के किनारों पर हरित पट्टी विकसित करने, अवैध अतिक्रमण हटाने और नदी तटों के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने पर भी विचार किया गया। श्री योगेश कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय से ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
बैठक के अंत में संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि वे आपसी तालमेल के साथ सख्त और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से साझा करें। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को भी यमुना संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए।
इस समीक्षा बैठक को यमुना प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में नदी की स्वच्छता और पर्यावरणीय संतुलन में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।


