वित्त वर्ष 2026–27 के बजट निर्माण की प्रक्रिया को अधिक समावेशी, संतुलित और जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से सभी पक्षकारों से सुझाव और परामर्श का दौर निरंतर जारी है। इसी क्रम में आज Gurugram में आयोजित प्री-बजट बैठक में महिला उद्यमियों एवं शिक्षाविदों के साथ व्यापक और सार्थक विचार-विमर्श किया गया। बैठक का उद्देश्य जमीनी स्तर के अनुभवों और विविध दृष्टिकोणों को नीति निर्माण में समुचित स्थान देना रहा।
प्री-बजट बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार बजट को केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला रोडमैप मानती है। इसलिए बजट-पूर्व परामर्श को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों—विशेषकर महिलाओं, उद्यमियों, शिक्षाविदों और युवाओं—की अपेक्षाएं और सुझाव सीधे नीति निर्धारण तक पहुंच सकें। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी प्री-बजट कंसल्टेशन को मजबूत और व्यापक बनाया गया है।
बैठक के दौरान महिला उद्यमियों ने उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए आसान ऋण, बाजार तक बेहतर पहुंच, कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल सशक्तिकरण जैसे विषयों पर अपने सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में लक्षित प्रावधानों की आवश्यकता है, जिससे रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
शिक्षाविदों ने शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा में शोध और नवाचार, कौशल विकास तथा उद्योग-शिक्षा सहयोग पर जोर दिया। उनका कहना था कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा और कौशल को बजट की प्राथमिकताओं में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को रोजगारोन्मुख और तकनीक-सक्षम बनाया जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शिक्षा संस्थानों में बुनियादी ढांचे और डिजिटल संसाधनों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए जाएं।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बजट में सामाजिक समावेशन, महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और सतत विकास के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि एक प्रभावी बजट वही होता है, जो आर्थिक विकास के साथ-साथ समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ सके।
अधिकारियों ने प्रतिभागियों को आश्वस्त किया कि प्री-बजट बैठकों के माध्यम से प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से आए व्यावहारिक सुझाव बजट को अधिक यथार्थवादी और परिणामोन्मुख बनाने में सहायक होते हैं। सरकार का प्रयास है कि बजट में केवल घोषणाएं ही नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा भी हो।
बैठक के समापन पर प्रतिभागियों ने प्री-बजट परामर्श की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह का संवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2026–27 का बजट विकास, समावेशन और नवाचार का संतुलित दस्तावेज होगा, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रगति को नई गति देगा।


