भारतीय संस्कृति के गौरव, महान संत, विचारक और आधुनिक भारत के प्रेरणास्रोत Swami Vivekananda की जयंती के अवसर पर देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस श्रद्धा, उत्साह और संकल्प के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए युवाओं ने उनके विचारों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
स्वामी विवेकानंद केवल एक संन्यासी नहीं थे, बल्कि वे ऐसे युगद्रष्टा थे जिन्होंने भारत की आत्मा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध कथन—“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”—आज भी देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और सरकारी मंचों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी जी के विचार मात्र शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मंत्र हैं, जो युवाओं को आत्मनिर्भर, अनुशासित और सेवा भाव से प्रेरित करते हैं।
आज का भारत युवा शक्ति से परिपूर्ण है। देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा युवाओं का है, जो यदि सही दिशा में अपनी ऊर्जा का उपयोग करे तो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार हो सकता है। स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम बताया। उनके अनुसार सशक्त शिक्षा वही है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए और समाज के प्रति उसके कर्तव्यों का बोध कराए।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर यह संदेश विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाता है कि युवा वर्ग केवल अपने व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रहे, बल्कि समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण को अपने जीवन का लक्ष्य बनाए। स्वामी विवेकानंद का दर्शन हमें यह सिखाता है कि सेवा ही सच्ची साधना है और राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा से जुड़े।
इस अवसर पर युवाओं से आह्वान किया गया कि वे नशा, हिंसा और नकारात्मकता से दूर रहकर शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक कार्यों में अपनी भूमिका निभाएं। ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए आवश्यक है कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दें और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में उतारें।
अंततः राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और यदि युवा उन्हें अपने जीवन में अपनाएं, तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।


