महान समाज सुधारक, किसानों के मसीहा और दीन-दुखियों के सच्चे हितैषी दीनबंधु सर छोटूराम जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन अन्नदाताओं, शोषितों और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा तथा समाज सुधार के लिए समर्पित कर दिया। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय इतिहास में सामाजिक न्याय, समानता और किसान सशक्तिकरण का सशक्त प्रतीक है।
सर छोटूराम जी का जन्म 1881 में हरियाणा के रोहतक जिले के गढ़ी सांपला गांव में हुआ। साधारण किसान परिवार में जन्मे छोटूराम जी ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों, किसानों की समस्याओं और सामाजिक असमानताओं को निकट से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बना। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम माना और इसी के बल पर वे समाज सुधार के मार्ग पर अग्रसर हुए।
ब्रिटिश शासनकाल में जब किसान कर्ज, साहूकारों के शोषण और अन्यायपूर्ण कानूनों से त्रस्त थे, तब सर छोटूराम जी ने उनकी आवाज़ बुलंद की। उन्होंने किसानों और मजदूरों के हक में अनेक क्रांतिकारी कानून बनवाए, जिनसे ग्रामीण समाज को नई दिशा मिली। साहूकारों के अत्याचार पर रोक लगाने, भूमि की सुरक्षा और किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए उनके प्रयास ऐतिहासिक माने जाते हैं। इन्हीं सुधारों के कारण उन्हें ‘किसानों का मसीहा’ कहा जाता है।
सर छोटूराम जी केवल किसान नेता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। वे जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर समतामूलक समाज की कल्पना करते थे। उनका मानना था कि जब तक किसान और मेहनतकश वर्ग सशक्त नहीं होगा, तब तक देश का वास्तविक विकास संभव नहीं है। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष किया और शिक्षा, जागरूकता तथा संगठन पर विशेष बल दिया।
हरियाणा और उत्तर भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में सर छोटूराम जी के योगदान को आज भी आधार स्तंभ के रूप में देखा जाता है। उनके द्वारा किए गए सुधारों का प्रभाव आज भी किसानों की सुरक्षा और अधिकारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अनेक संस्थान, विश्वविद्यालय और योजनाएं उनके नाम से प्रेरित होकर आज भी समाज सेवा के कार्य में संलग्न हैं।
पुण्यतिथि के अवसर पर प्रदेशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि सच्ची सेवा वही है, जो अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। दीनबंधु सर छोटूराम जी के आदर्श, विचार और संघर्ष सदैव हमें सामाजिक न्याय, किसान कल्याण और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।


