ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (CPRI) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ स्तर पर की गई। बैठक के दौरान CPRI की मौजूदा टेस्टिंग फ़ैसिलिटी को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने को लेकर विस्तृत और व्यापक समीक्षा की गई।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भविष्य में बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में अत्याधुनिक एवं उच्च क्षमता वाले विद्युत उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए देश में ही विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं का होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य के तहत @CPRI_MoP की परीक्षण सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित विस्तार के बाद CPRI में उन्नत विद्युत उपकरणों जैसे हाई-वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर, स्मार्ट ग्रिड से जुड़े उपकरण, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित उत्पादों की टेस्टिंग देश के भीतर ही संभव हो सकेगी। इससे भारतीय उद्योगों को विदेशी लैब्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और समय व लागत दोनों की बचत होगी।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में कई अत्याधुनिक विद्युत उपकरणों की टेस्टिंग के लिए आयात पर निर्भरता रहती है या उन्हें विदेशों में परीक्षण के लिए भेजना पड़ता है। CPRI की क्षमताओं के विस्तार से यह निर्भरता काफी हद तक कम होगी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि देश के भीतर ही तकनीकी दक्षता और विशेषज्ञता का विकास भी होगा।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई गति देगी। जब देश में ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो घरेलू कंपनियां अधिक आत्मविश्वास के साथ उन्नत विद्युत उपकरणों का निर्माण कर सकेंगी। साथ ही, भारत को वैश्विक स्तर पर विद्युत उपकरण निर्माण और परीक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
बैठक में CPRI की अनुसंधान गतिविधियों, मानव संसाधन विकास और तकनीकी नवाचारों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिए कि परीक्षण प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी, तेज और उद्योग-अनुकूल बनाया जाए, ताकि स्टार्टअप्स और एमएसएमई सेक्टर को भी इसका भरपूर लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे इस तरह के संस्थागत सशक्तिकरण से भारत की बिजली व्यवस्था और अधिक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ बनेगी। नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में यह विस्तार देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान की टेस्टिंग सुविधाओं के विस्तार को लेकर की गई यह समीक्षा ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में भारत की औद्योगिक और तकनीकी प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।


