पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री Tarunpreet Singh Sond ने सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था Akal Takht Sahib के समक्ष उपस्थित होकर अपने विभाग से जुड़े एक मामले पर औपचारिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। जत्थेदार साहिब द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में मंत्री ने पूर्ण विनम्रता और श्रद्धा के साथ यह प्रक्रिया पूरी की।
धार्मिक मर्यादा और सम्मान का परिचय देते हुए मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड नंगे पैर Sri Darbar Sahib तक पहुंचे, जहां उन्होंने दीक्षा ग्रहण की और इसके उपरांत श्री अकाल तख़्त साहिब में मत्था टेककर अपनी आस्था प्रकट की। इसके बाद उन्होंने श्री अकाल तख़्त साहिब के सचिवालय में सिंह साहिबान के समक्ष विभाग की ओर से अपना पक्ष और स्पष्टीकरण रखा।
कार्यवाही के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री सोंड ने कहा कि श्री अकाल तख़्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है और सिंह साहिबान द्वारा जारी प्रत्येक निर्देश सभी के लिए बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को एक विनम्र सिख के रूप में प्रस्तुत करते हुए पंथ की मर्यादा और आदेशों का पूर्ण सम्मान करते हैं।
मंत्री ने बताया कि यह मामला श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर श्री आनंदपुर साहिब में निर्मित भाई जैता जी स्मारक से जुड़ा था। स्मारक में प्रदर्शित एक चित्र को लेकर जत्थेदार साहिब ने आपत्ति जताई थी। इस पर विभाग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उसी दिन संबंधित चित्र में आवश्यक सुधार कर दिया था। बावजूद इसके, विभागीय प्रमुख होने के नाते मंत्री स्वयं श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष उपस्थित होकर औपचारिक स्पष्टीकरण देने पहुंचे।
सिंह साहिबान ने मंत्री का पक्ष सुनने के बाद निर्देश दिए कि भविष्य में विभाग द्वारा किए जाने वाले सभी कार्यों में सिख धार्मिक आचार संहिता और मर्यादा का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि गुरुओं और शहीदों की गरिमा एवं सम्मान से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए। सिंह साहिबान ने विभाग को यह सलाह भी दी कि गुरमत विचारधारा के जानकार विद्वान को विभाग से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की चूक न हो।
मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann को दी जाएगी और सरकार स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आगे किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने बताया कि विभाग को पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि धर्म से संबंधित किसी भी आयोजन या परियोजना से पूर्व Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee और श्री अकाल तख़्त साहिब से मार्गदर्शन अवश्य लिया जाए।
मंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार सिख परंपराओं, भावनाओं और धार्मिक संस्थाओं के सर्वोच्च सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में हर कदम मर्यादा के अनुरूप ही उठाया जाएगा।


