हरियाणा सरकार ने राज्य में चल रही और प्रस्तावित विशेष रेलवे परियोजनाओं के समयबद्ध और सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य रेलवे से जुड़ी विकास परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है, ताकि बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल सके।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत विशेष रेलवे परियोजनाओं से संबंधित भूमि अधिग्रहण के लिए जिला राजस्व अधिकारियों को सक्षम प्राधिकारी (सीएएलए) के रूप में नामित किया गया है। इसके साथ ही, संभागीय आयुक्तों को इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका सौंपी गई है।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में प्रशासनिक स्पष्टता आएगी और विभिन्न स्तरों पर होने वाली देरी को रोका जा सकेगा। जिला स्तर पर सक्षम प्राधिकारी नियुक्त होने से स्थानीय परिस्थितियों और जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझते हुए निर्णय लिए जा सकेंगे, जिससे किसानों और भूमि स्वामियों को भी समय पर न्याय मिल सकेगा।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि रेलवे परियोजनाएं राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से न केवल यात्री परिवहन सशक्त होगा, बल्कि औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा विकास की गति को प्रभावित कर सकती है, जिसे दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
उन्होंने बताया कि संभागीय आयुक्तों को मध्यस्थ बनाए जाने से भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों और आपत्तियों का समाधान प्रभावी और समयबद्ध ढंग से किया जा सकेगा। इससे न्यायिक प्रक्रियाओं पर बोझ भी कम होगा और परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी हो सकेंगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय केंद्र सरकार की रेलवे विस्तार योजनाओं के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने में भी सहायक होगा। हरियाणा से होकर गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं—जिनका सीधा संबंध औद्योगिक क्षेत्रों, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से है—इस फैसले से लाभान्वित होंगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और मुआवजे के निर्धारण में भी स्पष्टता आएगी। इससे भूमि स्वामियों का भरोसा बढ़ेगा और आपसी सहमति से कार्य आगे बढ़ाने में आसानी होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा सरकार का यह कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की दिशा में एक व्यावहारिक और दूरदर्शी पहल है। इससे न केवल रेलवे परियोजनाओं को गति मिलेगी, बल्कि राज्य के समग्र विकास में भी योगदान होगा।
कुल मिलाकर, विशेष रेलवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुदृढ़ करने का यह निर्णय हरियाणा को एक मजबूत, आधुनिक और कनेक्टेड राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


