भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज सेविका एवं नारी सशक्तिकरण की प्रणेता सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर देशभर में उन्हें कोटिशः नमन किया गया। उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
सावित्रीबाई फुले ने 19वीं शताब्दी में उस समय शिक्षा का दीप प्रज्वलित किया, जब समाज में महिलाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा को लेकर गहरी रूढ़ियाँ और भेदभाव व्याप्त थे। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम मानते हुए बालिकाओं और दलित वर्ग के लिए विद्यालयों की स्थापना की और समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध निर्भीक संघर्ष किया।
उनका जीवन संघर्ष, साहस और समर्पण की मिसाल है। सामाजिक उपेक्षा और विरोध के बावजूद सावित्रीबाई फुले ने अपने संकल्प से पीछे हटने के बजाय शिक्षा और समानता के मार्ग को और अधिक सुदृढ़ किया। नारी सशक्तिकरण की दिशा में उनके प्रयास आज भी प्रेरणास्रोत हैं।
सावित्रीबाई फुले की शिक्षाएं और विचार वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनका संघर्ष और समर्पण सदैव वंदनीय रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरित करता रहेगा।
भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज सेविका एवं नारी सशक्तिकरण की प्रणेता सावित्री बाई फुले जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।
शिक्षा के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध अलख जगाने वाला उनका संघर्ष और समर्पण सदैव वंदनीय रहेगा। pic.twitter.com/BYftkv5tfC
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) January 3, 2026


