VeerBaalDiwas के पावन अवसर पर धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के वीर साहिबजादों और माता गुजरी जी के अद्वितीय बलिदान को देश ने कोटि-कोटि नमन किया।
“सूरा सो पहचानिए जो लरै दीन के हेत,
पुरजा पुरजा कट मरै कबहूं ना छाडै खेत” — यह पंक्तियाँ साहिबजादों के अदम्य साहस, धर्मनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम को चरितार्थ करती हैं। अल्पायु में भी अत्याचारों के सामने न झुकते हुए उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च त्याग का मार्ग चुना।
माता गुजरी जी का धैर्य, साहस और उनके द्वारा दिए गए उच्च संस्कार ही थे, जिन्होंने नन्हें साहिबजादों को कठिनतम परिस्थितियों में भी अडिग रखा। उनका यह महान त्याग केवल सिख इतिहास ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।
वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि साहिबजादों और माता गुजरी जी का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा। उनका यह अमर योगदान युगों-युगों तक राष्ट्र और मानवता को दिशा देता रहेगा।


