नई दिल्ली। भारत की गौरवशाली परंपरा शूरवीरों की गाथाओं से भरी पड़ी है—ऐसे योद्धा जिन्होंने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वे शूरवीर जिनके लिए मातृभूमि की आन-बान-शान सर्वोपरि रही और जिन्होंने युद्धभूमि में असहनीय पीड़ा सहते हुए भी कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इतिहास के पन्नों में दर्ज ये वीर गाथाएं बताती हैं कि सच्चा शूरवीर वही होता है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और कर्तव्य के पथ से विचलित न हो। जब युद्ध में अंग-अंग कट जाने जैसी कठिन परीक्षा सामने आई, तब भी इन वीरों का संकल्प अडिग रहा। उनका लक्ष्य केवल विजय नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और मानव मूल्यों की रक्षा था।
ऐसे शूरवीरों का जीवन आज भी समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका त्याग यह संदेश देता है कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि अटूट संकल्प, आत्मबल और निस्वार्थ सेवा से होती है।
आज जब हम आधुनिक युग में आगे बढ़ रहे हैं, तब इन शूरवीरों की गाथाएं हमें यह स्मरण कराती हैं कि हमारी स्वतंत्रता, संस्कृति और पहचान असंख्य बलिदानों की देन है। देश और धर्म के लिए लड़े इन अमर वीरों को नमन करते हुए यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जाए।
शूरवीर उसे जानिए जो देश-धर्म के लिए लड़े
लड़ाई में अंग-अंग कट जाए तो भी पीछे न हटे pic.twitter.com/LeKjNEgzur— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) December 21, 2025


