चंडीगढ़। न्यायमूर्ति लिसा गिल के मार्गदर्शन में हरियाणा में आयोजित चौथी राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निपटारे का सराहनीय उदाहरण देखने को मिला। लोक अदालत एवं पूर्व-लोक अदालत बैठकों को मिलाकर कुल 5,53,741 मामलों का समाधान किया गया।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण, बीमा, बिजली-पानी बिल, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक विवाद और अन्य दीवानी व फौजदारी मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। अदालतों पर बोझ कम करने और आमजन को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में यह आयोजन अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ।
लोक अदालत के दौरान 18 वर्षों से लंबित वैवाहिक विवाद और नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा से जुड़े एक संवेदनशील मामले का भी सौहार्दपूर्ण समाधान किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने न्याय प्रणाली की मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण पहल बताया।
न्यायमूर्ति लिसा गिल ने कहा कि लोक अदालतें न्याय को सरल, सुलभ और किफायती बनाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और संबंधित विभागों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में आपसी सद्भाव और विश्वास को मजबूत करते हैं।
राष्ट्रीय लोक अदालत के इस सफल आयोजन से हजारों परिवारों को राहत मिली और न्याय व्यवस्था में आमजन का भरोसा और अधिक सुदृढ़ हुआ।


