नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की भावना और इसकी प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा गया कि आजादी के आंदोलन के समय भी देश को एकजुट करने में वंदे मातरम् की अहम भूमिका रही और आज भी यह राष्ट्रप्रेम तथा एकता का प्रतीक बना हुआ है। वक्ताओं ने कहा कि जब वर्ष 2047 में महान और विकसित भारत की परिकल्पना साकार होगी, तब भी वंदे मातरम् की प्रेरक शक्ति उतनी ही महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
कार्यक्रम में कहा गया कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की आत्मा, संकल्प और गौरव का प्रतीक है। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में त्याग, साहस और बलिदान की भावना का संचार किया और आज भी यह मूल्य नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे वंदे मातरम् की भावना को आत्मसात कर देश की उन्नति, एकता और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य में अपना योगदान दें।
वंदे मातरम की जरूरत आजादी के आंदोलन के वक्त भी थी, आज भी है और जब 2047 में महान भारत की रचना होगी तब भी रहेगी। pic.twitter.com/IhdUaoMVMI
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) December 9, 2025


