नई दिल्ली—1962 के भारत-चीन युद्ध में अद्वितीय बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान का परिचय देने वाले परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह जी की जयंती पर आज पूरे देश ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। राष्ट्र इस वीर योद्धा की वीरता, पराक्रम और मातृभूमि के प्रति समर्पण को नमन कर रहा है।
मेजर शैतान सिंह, 13 कुमाऊँ रेजिमेंट के कमांडर के रूप में रेज़ांग ला के ऐतिहासिक युद्ध में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए अंतिम सांस तक लड़ते रहे। कठिन परिस्थितियों, तीव्र ठंड और दुश्मन के भारी हमले के बावजूद उन्होंने जिस साहसिक नेतृत्व का परिचय दिया, वह भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
उनकी जयंती के अवसर पर विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठानों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां वक्ताओं ने उनके शौर्य और बलिदान को प्रेरणास्रोत बताया। मेजर शैतान सिंह की वीर गाथा आज भी देश के युवाओं में कर्तव्य, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और अदम्य साहस की भावना जगाती है।
रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि मेजर शैतान सिंह का बलिदान न केवल 1962 के युद्ध की गौरवगाथा का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सेना की परंपरा—“देश पहले, बाकी सब बाद में”—का सर्वोच्च उदाहरण है।
राष्ट्र आज इस महान सपूत को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए प्रणाम करता है।
जय हिंद।
1962 के भारत-चीन युद्ध में अद्वितीय साहस, अटूट वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।
मां भारती की रक्षा में उनका अनुपम योगदान सदैव अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य, समर्पण और देशभक्ति की प्रेरणा देता… pic.twitter.com/9UXfnYakxD
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) December 1, 2025


