कुरुक्षेत्र—भारत की अध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने तीर्थ स्थलों की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक भूमिका पर व्यापक चर्चा की। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए प्रमुख वक्ता ने कहा कि हमारे तीर्थ स्थल सदैव भाव, भक्ति, ज्ञान और जीवन मूल्यों के केंद्र रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान पीढ़ी को इन मूल्यों से जोड़ने के लिए ऐसे सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हैं बल्कि समाज को एकजुट करने और मानवता की दिशा में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने का कार्य भी करते हैं।
सम्मेलन में विभिन्न धार्मिक संस्थानों, विद्वानों, संतों और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पैनल चर्चाओं में भारतीय संस्कृति की अनंत धरोहर, गीता दर्शन, आध्यात्मिक पर्यटन और तीर्थ स्थलों के संरक्षण पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय अध्यात्म और जीवन मूल्य पहुँचाना था। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान का मंच प्रदान करती हैं, बल्कि विश्व में भारतीय संस्कृति के प्रभाव को और भी व्यापक बनाती हैं।
सम्मेलन का समापन आशीर्वचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसने उपस्थित लोगों को भारतीय परंपरा और आध्यात्मिकता से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
हमारे तीर्थ स्थल सदैव भाव, भक्ति, ज्ञान और जीवन मूल्यों के केंद्र रहे हैं, इन्हीं सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की यात्रा को आगे बढ़ाने में यह सम्मेलन एक अत्यंत सार्थक और प्रेरणादायक पहल है। pic.twitter.com/ZM8mInOS9y
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) November 30, 2025


