कुरुक्षेत्र। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण के बीच गीता के महत्व पर विशेष चर्चा हुई। विद्वानों और संतों ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक है, जो व्यक्ति को हर परिस्थिति में दृढ़ता, साहस और संतुलन प्रदान करती है।
वक्ताों ने कहा कि गीता का अध्ययन मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी उत्साह और आशा से भर देता है। जब जीवन में निराशा, द्वंद्व या मानसिक उलझनें बढ़ जाती हैं, तब गीता आत्मचिंतन का मार्ग दिखाती है और कर्म, कर्तव्य तथा धर्म के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देती है।
महोत्सव के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि गीता के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने महाभारत काल में थे। यह ग्रंथ मन की शंकाओं को दूर कर, नकारात्मकता को हटाकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विद्यार्थी और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए तथा गीता के उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसे पढ़कर विपरीत परिस्थितियों में उत्साह और आशा का संचार होता है। गीता न केवल आत्मचिंतन का मार्ग दिखाती है, बल्कि मन की उलझनों को सुलझाने में भी सहायक है। pic.twitter.com/y4V1EXkD9Z
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) November 24, 2025


