पैर सुन्न होना या झुनझुनी आना गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। जानिए इसके कारण, लक्षण, और बचाव के उपाय इस हेल्थ गाइड में।
पैर सुन्न होना या झुनझुनी आना: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि अचानक पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी सी महसूस होती है? अगर यह बार-बार होता है, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अक्सर यह आम बात लगती है, लेकिन लगातार पैरों में झुनझुनी आना या सुन्न हो जाना कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।
पैर सुन्न होना या झुनझुनी क्यों होती है?
शरीर के किसी हिस्से में झुनझुनी या सुन्नता आमतौर पर तब होती है जब उस हिस्से की नसों पर दबाव पड़ता है – जैसे गलत पोजिशन में बैठना या लेटना। लेकिन यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी होती है, तो यह इन समस्याओं का संकेत हो सकता है:
बार-बार झुनझुनी आने के संभावित कारण
पेरीफेरल न्यूरोपैथी: नसों की क्षति से जुड़ी समस्या, जो अक्सर डायबिटीज के कारण होती है।
डायबिटीज: हाई ब्लड शुगर लेवल नसों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे झुनझुनी और सुन्नता हो सकती है।
विटामिन B12 की कमी: विटामिन B12 की कमी से तंत्रिका तंत्र कमजोर होता है, जिससे पैरों में सुन्नपन हो सकता है।
थायराइड की समस्या: हाइपोथायरॉइडिज्म तंत्रिका को प्रभावित करता है।
मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS): यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।
अन्य लक्षण जिनसे सतर्क रहें:
पैरों में जलन या चुभन जैसा अहसास
चलने में असहजता या बैलेंस की समस्या
रात के समय लक्षणों का बढ़ना
पैरों में कमजोरी या भारीपन महसूस होना
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो यह नर्व डैमेज या खून के संचार में रुकावट का संकेत हो सकता है।
कैसे होती है जांच?
ब्लड टेस्ट – डायबिटीज, थायराइड या विटामिन B12 की कमी का पता लगाने के लिए।
नर्व कंडक्शन स्टडी – तंत्रिका क्षति की स्थिति मापने के लिए।
MRI या CT स्कैन – रीढ़ की हड्डी या नसों पर दबाव की जांच के लिए।
EMG टेस्ट – मांसपेशियों और तंत्रिकाओं की कार्यक्षमता जानने के लिए।
बचाव और घरेलू उपाय
- संतुलित आहार लें: विटामिन B12 युक्त आहार जैसे अंडा, दूध, पनीर, मछली आदि का सेवन करें हाई-फाइबर और लो-फैट डाइट अपनाएं।
- नियमित व्यायाम करें: रोजाना योग और स्ट्रेचिंग करें, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है। ज्यादा देर तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।
- धूम्रपान और शराब से बचें: ये दोनों नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- हाइड्रेटेड रहें: दिनभर में कम से कम 2–3 लीटर पानी जरूर पिएं।
- समय-समय पर जांच कराएं: यदि बार-बार सुन्नपन होता है, तो न्यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन से परामर्श लें।


