Ekadashi Vrat 2025: जानिए एकादशी व्रत के दौरान किन नियमों का पालन जरूरी है। चावल, मांसाहार और झूठ जैसी 10 चीजें जो व्रत की शुद्धता को प्रभावित कर सकती हैं।
Ekadashi Vrat 2025: सनातन धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की उपासना के लिए सबसे पवित्र दिन माना जाता है। यह दिन न सिर्फ उपवास करने का है, बल्कि संयम, साधना और शुद्ध आचरण से भी जुड़ा हुआ है। एकादशी व्रत रखने से पहले यदि कुछ महत्वपूर्ण नियमों का ध्यान न रखा जाए, तो व्रत का फल अधूरा रह सकता है। आइए जानते हैं कि एकादशी व्रत के दिन किन 10 कार्यों से बचना चाहिए ताकि पूर्ण पुण्य की प्राप्ति हो सके।
1. एकादशी पर चावल न खाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन चावल या चावल से बनी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चावल में विशेष प्रकार की ऊर्जा होती है जो व्रत की पवित्रता को प्रभावित कर सकती है।
2. मांसाहार और शराब से परहेज करें
एकादशी के दिन शुद्ध सात्विक भोजन करना चाहिए। मांस, मछली, अंडा और शराब जैसे तामसिक पदार्थ न केवल शरीर को दूषित करते हैं बल्कि पूजा-पाठ में मन लगाने से भी रोकते हैं।
3. झूठ बोलना और विवाद करना वर्जित
वाणी में शुद्धता बनाए रखें। झूठ बोलना, अपशब्दों का प्रयोग करना या किसी से झगड़ा करना एकादशी व्रत की आत्मा के खिलाफ माना जाता है।
4. क्रोध और द्वेष से रहें दूर
गुस्सा आत्मिक शांति को छीन लेता है। एकादशी के दिन संयमित और शांत रहना ही शुभ माना गया है। ध्यान और भक्ति में मन लगाना इस दिन का मुख्य उद्देश्य होता है।
5. तुलसी के पत्ते न तोड़ें
एकादशी पर तुलसी माता भी उपवास करती हैं, ऐसा शास्त्रों में उल्लेख है। इसलिए इस दिन तुलसी दल तोड़ना वर्जित है।
6. दिन में न करें सोना
एकादशी के दिन दिन में सोने से व्रत का आधा पुण्य नष्ट हो जाता है। इस दिन अधिक से अधिक समय भगवान विष्णु के ध्यान, मंत्र जाप और कथा श्रवण में लगाना चाहिए।
7. साधारण नमक का न करें उपयोग
व्रत में केवल सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए। साधारण नमक व्रत की पवित्रता को प्रभावित करता है।
8. काले कपड़े न पहनें
काले रंग को नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। एकादशी जैसे शुभ दिन पर हल्के रंग जैसे सफेद, पीला या गुलाबी रंग पहनना शुभ होता है।
9. घर को रखें स्वच्छ और शांत
गृहस्थ जीवन में स्वच्छता का महत्व विशेष रूप से एकादशी पर और बढ़ जाता है। इस दिन घर को साफ-सुथरा रखना और पूजा का वातावरण पवित्र बनाए रखना बेहद जरूरी है।
10. बुरी संगति और आदतों से रहें दूर
एकादशी आत्मिक शुद्धता और आत्मनियंत्रण का पर्व है। इस दिन जुआ, सट्टा, गाली-गलौज या अन्य किसी भी बुरी आदत से दूर रहना चाहिए।
एकादशी का वास्तविक उद्देश्य
मानसिक और आत्मिक शुद्धि
ईश्वर से जुड़ाव और ध्यान
संयमित जीवनशैली का अभ्यास
पापों से मुक्ति और पुण्य लाभ


