सावन 2025 में शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते समय तुलसी, कुमकुम, अक्षत और शंख से अभिषेक न करें। जानिए सावन महीने में शिव पूजा की सही विधि और आम गलतियों से कैसे बचें।
सावन 2025: सावन मास भगवान शिव की पूजा का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस महीने में शिवभक्त शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर विशेष अभिषेक करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगा का अवतरण भगवान शिव की जटाओं से हुआ था, इसलिए सावन में शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायक होता है। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि गंगाजल के साथ कुछ चीजें शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है। ऐसे कृत्य शिवजी को प्रसन्न करने के बजाय उनकी नाराजगी का कारण बन सकते हैं।
सावन में शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
1. तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं
तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु को प्रिय होते हैं, लेकिन शिवलिंग पर तुलसी अर्पित करना वर्जित माना गया है। गंगाजल के साथ तुलसी चढ़ाने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता और शिवजी अप्रसन्न हो सकते हैं।
2. कुमकुम और सिंदूर से बचें
कुमकुम और सिंदूर सुहाग का प्रतीक हैं, जबकि शिवलिंग ब्रह्मचर्य और पुरुष तत्व का प्रतीक है। इसलिए सावन में गंगाजल के साथ इनका उपयोग शिवलिंग पर अशुभ माना जाता है।
3. अक्षत (कच्चे चावल) न चढ़ाएं
अक्सर पूजा में अक्षत का इस्तेमाल होता है, लेकिन शिवलिंग पर कच्चे चावल चढ़ाना पूजा की पवित्रता को प्रभावित करता है और इसलिए इसे वर्जित माना गया है।
4. शंख से गंगाजल अर्पित करना उचित नहीं
शंख समुद्र का प्रतीक होता है और शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर शंख से गंगाजल चढ़ाना निषिद्ध है। ऐसा माना जाता है क्योंकि शिवजी ने समुद्र मंथन से उत्पन्न विष ग्रहण किया था, इसलिए शंख से जल अर्पित करना अशुभ है।
सावन में शिव पूजा का महत्व
सावन मास शिवभक्तों के लिए विशेष होता है। इस महीने में भगवान शिव की आराधना से व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सही विधि से शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाना और पूजा-अर्चना करने से शिवजी की विशेष कृपा मिलती है।


