सावन 2025 में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा से मोक्ष, आरोग्यता और सभी मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण। जानें ब्रज मंडल में मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण उत्सव, हिंडोला, रासलीला और पूजा विधि।
सावन 2025 में भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का भी विशेष महत्व है। श्रावण मास में ब्रज मंडल के मंदिरों में श्रीकृष्ण पूजा का भव्य आयोजन होता है, जिसमें भक्तजन बड़ी श्रद्धा से भाग लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में द्वारकाधीश की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, साथ ही उपासकों को आरोग्य और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
श्रावण मास में श्रीकृष्ण पूजा का महत्व
सावन और भाद्रपद मास वर्षा ऋतु के पवित्र महीने हैं, जो जीवन में नयी ऊर्जा और समृद्धि लेकर आते हैं। इस माह में चातुर्मास का प्रारंभ होता है और इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की पूजा से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। माना जाता है कि जो संन्यासी इस दौरान कृष्ण की आराधना करते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और गृहस्थों को भगवान श्रीकृष्ण से आरोग्यता व सुख-समृद्धि मिलती है।
ब्रज मंडल में सावन उत्सव
ब्रज मंडल के प्रमुख स्थल मथुरा, वृंदावन, गोकुल और बरसाना में सावन मास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की पूजा बड़े उत्साह के साथ होती है। यहाँ पूरे महीने श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा, हिंडोला उत्सव, रासलीला, और घटा महोत्सव जैसे आयोजन होते हैं।
हिंडोला उत्सव: मंदिरों में चांदी और सोने के बने हिंडोलों में भगवान कृष्ण को झुलाया जाता है। यह पर्व सावन कृष्ण पक्ष की अष्टमी से लेकर जन्माष्टमी तक चलता है।
रासलीला: वृंदावन में विश्वप्रसिद्ध रासलीला का आयोजन होता है, जहाँ कृष्ण लीलाओं का सुंदर मंचन किया जाता है।
घटा महोत्सव: मंदिरों को रंग-बिरंगी घटाओं से सजाया जाता है और भक्त उनकी लीलाएं देखते हैं।
सावन में श्रीकृष्ण पूजा की विधि
श्रावण मास में श्रीकृष्ण की पूजा करने के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर या मंदिर में बाल कृष्ण की मूर्ति स्थापित करें। दूध, दही, मिश्री, तुलसी, माखन और फूल अर्पित करें। “ॐ श्रीकृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें और पूजा के बाद भजन-कीर्तन करें। यह पूजा भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है


