Kedarnath-Badrinath Dham 2025: क्या वाकई केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम हो जाएंगे लुप्त? स्कंद पुराण में की गई रहस्यमयी भविष्यवाणी के अनुसार यह पवित्र तीर्थ एक दिन होंगे अदृश्य। जानिए क्या होगा तब और कहां होंगे भविष्य के धाम।
Kedarnath-Badrinath Dham 2025: हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड स्थित केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन पवित्र स्थलों के बारे में स्कंद पुराण में एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की गई है? एक समय ऐसा आएगा जब यह दिव्य धाम अदृश्य (लुप्त) हो जाएंगे और इन तक आम लोगों की पहुंच संभव नहीं होगी।
क्या कहती है स्कंद पुराण की भविष्यवाणी?
स्कंद पुराण में वर्णित है:
“बहुनि सन्ति तीर्थानि दिव्य भूमि रसातले।
बद्री सदृश्य तीर्थं न भूतो न भविष्यतिः॥”
इसका अर्थ है – धरती पर कई तीर्थ स्थल हैं, लेकिन बद्रीनाथ जैसा कोई नहीं था और ना ही भविष्य में होगा। यह संकेत देता है कि कलियुग में एक समय ऐसा भी आएगा जब यह तीर्थ स्थल लुप्त हो जाएंगे।
कब और कैसे लुप्त होंगे केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे, तब बद्रीनाथ धाम सामान्य जन के लिए अदृश्य हो जाएगा। यह घटना कलियुग के अंतिम चरण में घटित होगी। अनुमान है कि यह घटना 5,000–5,500 वर्षों के बाद घट सकती है – जो वर्तमान समय से मेल खा रही है।
भविष्यवाणी के संकेत: क्या जोशीमठ में भगवान नरसिंह की मूर्ति दे रही है संकेत?
स्कंद पुराण में यह भी उल्लेख है कि बद्रीनाथ धाम के लुप्त होने से पहले जोशीमठ स्थित भगवान नरसिंह की मूर्ति का दाहिना हाथ टूट जाएगा। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, मूर्ति की उंगलियां धीरे-धीरे पतली हो रही हैं, जो भविष्यवाणी के सत्य होने की ओर संकेत हो सकता है।
धामों के लुप्त होने के बाद कहां होंगे दर्शन?
जब केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम लुप्त हो जाएंगे, तब भक्तों के लिए “भविष्य केदार” और “भविष्य बद्री” तीर्थस्थल बनेंगे:
भविष्य बद्री: जोशीमठ से 25 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां भगवान विष्णु की पूजा नरसिंह अवतार में की जाएगी।
भविष्य केदार: यह स्थान भी जोशीमठ क्षेत्र में ही स्थित है, जहां भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियाँ विद्यमान हैं। भविष्य में यह स्थान केदारनाथ का विकल्प बनेगा।
मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने भी इन स्थलों पर तपस्या की थी।
केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
चारधाम यात्रा में शामिल केदारनाथ और बद्रीनाथ तीर्थ हिंदू धर्म में मोक्षदायिनी यात्रा मानी जाती है। यह सिर्फ तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है।
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