RBI news: RBI अब बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी डालने की स्पीड को कम कर सकता है। बीते 6 महीनों में RBI ने करीब ₹8.57 लाख करोड़ नकदी सिस्टम में डाली है।
RBI news: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी डालने की स्पीड को कम कर सकता है। बीते 6 महीनों में RBI ने करीब ₹8.57 लाख करोड़ (लगभग $100 बिलियन) नकदी सिस्टम में डाली है। अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार को मिलने वाला बड़ा सरप्लस ट्रांसफर भविष्य में नकदी के लिए पर्याप्त होगा।
ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) पर ब्रेक
RBI ने हाल ही में अपना अंतिम ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) पूरा किया है और इसके बाद कोई नई OMO घोषणा नहीं की गई। जानकारों का मानना है कि सरकारी खर्च से सिस्टम में खुद-ब-खुद लिक्विडिटी बढ़ जाएगी, जिससे आगे की जरूरत कम हो जाएगी।
सरकार को ₹3 से ₹4 लाख करोड़ तक का सरप्लस मिल सकता है
RBI सरकार को इस साल ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर कर सकता है।
Citi के अनुसार, यह आंकड़ा बढ़कर ₹3.5 लाख करोड़ से ₹4 लाख करोड़ तक भी जा सकता है।
यह ट्रांसफर मई 2025 के अंत तक घोषित होने की संभावना है।
लिक्विडिटी की भरमार से OMO पर तीन महीने की रोक
ICICI Securities के रिसर्च हेड ए. प्रसन्ना के मुताबिक, सरकार को मिलने वाले इस भारी डिविडेंड से सिस्टम में लगभग ₹5 लाख करोड़ की कोर लिक्विडिटी आ सकती है। इसलिए RBI को सितंबर 2025 तक OMO की जरूरत नहीं होगी।
बॉन्ड यील्ड में बड़ी गिरावट दर्ज
10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में अब तक 38 बेसिस पॉइंट की गिरावट।
5-वर्षीय यील्ड में 57 बेसिस पॉइंट की बड़ी गिरावट देखी गई।
इसका असर निवेशकों की ब्याज दरों और बॉन्ड की मांग पर साफ दिख रहा है।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
तत्काल लोन की ब्याज दरों में राहत की उम्मीद नहीं है क्योंकि RBI फिलहाल अतिरिक्त नकदी नहीं डालेगा।
सरकार को अधिक फंड मिलने से बजट खर्च में इजाफा हो सकता है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
ब्याज दरों और मार्केट यील्ड में स्थिरता देखने को मिल सकती है, जो निवेशकों के लिए फायदेमंद होगी।
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