Vinayak Chaturthi: 1 मई को विनायक चतुर्थी पर्व मनाया जाएगा, जिसमें भगवान गणेश की पूजा का खास महत्व है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से धन-समृद्धि और ज्ञान मिलता है।
Vinayak Chaturthi: विनायकी या विनायक चतुर्थी व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष में होता है। यह दिन भगवान श्री गणेश को समर्पित है, इसलिए विनायक प्रथम पूज्य श्री गणेश के लिए प्रयुक्त होता है। इस दिन गणपति का पूजन करना लाभदायी होता है।
विनायक चतुर्थी कब मनाई जाएगी?
30 अप्रैल 2025 को दोपहर 2:12 बजे से शुरू होगा और 1 मई 2025 को प्रातः 11:23 बजे समाप्त होगा। विनायक चतुर्थी का पर्व 1 मई 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। दृक पंचांग इसकी महत्ता बताता है। लेख में विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। भगवान से अपनी किसी भी मनोकामना को पूरा करने के लिए वरद कहते हैं। जो लोग विनायक चतुर्थी का भोजन करते हैं, उन्हें भगवान गणेश ज्ञान और धैर्य का वरदान देते हैं। सदियों से लोग जानते हैं कि ज्ञान और धैर्य दो महान नैतिक गुण हैं। जिन लोगों में ये गुण हैं, वे अपने जीवन में काफी उन्नति करते हैं और अपनी इच्छा के अनुरूप लाभ प्राप्त करते हैं।
गणेश पूजा करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, गणेश पूजा दोपहर को मध्याह्न के दौरान की जाती है। विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा का मुहूर्त है। इस दिन गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-दौलत, आर्थिक संपन्नता और ज्ञान भी मिलता है। पुराणों में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी कहते हैं, जबकि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।
विनायकी चतुर्थी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान कर लाल कपड़े पहनना चाहिए। इसके बाद, दोपहर के भोजन के दौरान, आप चाहे सोने, चांदी, पीतल, तांबा, मिट्टी, या सोने-चांदी से बनाई गई गणेश प्रतिमा स्थापित करने का निश्चय करें। फिर श्री गणेश की आरती करके षोडशोपचार पूजन करें। अब श्री गणेश को सिन्दूर चढ़ाएं। गणेशजी के प्रिय मंत्र, ‘ओम गं गणपतयै नमः’ को बोलते हुए 21 दूर्वा चढ़ाना भी आवश्यक है।
गणपति को किस चीज का भोग लगाना चाहिए?
श्री गणपति को बूंदी के लड्डू का भोग सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इनमें से पांच लड्डू ब्राह्मणों को दिए जाते हैं, पांच भगवान के चरणों में रखे जाते हैं, और बाकी प्रसाद में बांटे जाते हैं। गणेश पूजन के दौरान श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष और संकटनाशक गणेश स्तोत्र पढ़ना चाहिए।
वहीं, गणेश चतुर्थी कथा, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा और गणेश स्तुति का स्तवन करें। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करके ‘ओम गणेशाय नमः’ मंत्र की माला जपने से मनोरथ मिलता है।
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