Retail Inflation: दालों की कीमतों में 2.73% की गिरावट हुई, जबकि अनाज की महंगाई 5.93% रही। जिन लोगों का बजट सिर्फ दाल-रोटी और सब्जी पर निर्भर है, उनके लिए यह एक बड़ी राहत है।
Retail Inflation: यह भारतीय जनता के लिए राहत की खबर है। सितंबर 2019 के बाद देश में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) मार्च 2025 में सिर्फ 3.34% रह गई। सरकार ने मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, ये गिरावट खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के कारण हुई है।
महंगाई दर भी फरवरी में 3.61% थी, लेकिन अब इसमें और गिरावट आई है। ये गिरावट उस समय आई है जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन भारतीय बाजार में राहत का संकेत है।
अर्थव्यवस्था के लिए पॉजिटिव सिग्नल
विशेष रूप से, ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2 से 6 फीसदी की सीमा में नहीं हैं, बल्कि RBI के लक्ष्य 4 फीसदी से भी कम हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। अब खाद्य इंफ्लेशन मार्च में 2.69% पर आ गया, जो फरवरी में 3.75% था। फरवरी में सब्जियों की महंगाई -1% गिरी, लेकिन मार्च में -7% गिरी।
आम आदमी को राहत मिली
दालों की कीमतों में 2.73% की गिरावट हुई, जबकि अनाज की महंगाई 5.93% रही। जिन लोगों का बजट सिर्फ दाल-रोटी और सब्जी पर निर्भर है, उनके लिए यह एक बड़ी राहत है। ईंधन और बिजली (Fuel & Light) की कीमतों में भी कमी आई है, 1.48 प्रतिशत रह गई है, दोनों शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में। फरवरी में 3.79 प्रतिशत की ग्रामीण महंगाई घटकर 3.25 प्रतिशत हो गई है, और शहरी महंगाई भी अब 2.48% पर आ गई है।
क्या होगा?
हाल ही में रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई में गिरावट का ट्रेंड जारी रहेगा और FY26 (वित्त वर्ष 2025–26) में और राहत मिल सकती है। उनका कहना था कि अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहती हैं तो घरों पर खर्च का दबाव कम होगा। RBI ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता, जैसे अमेरिका ने बढ़ाए गए टैरिफ, अब भी एक बड़ा खतरा हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित कई देशों पर 26 फीसदी आयात शुल्क लगाया था, हालांकि चीन को छोड़कर बाकी सभी देशों को 90 दिन की राहत भी दी गई थी।
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