Donald Trump Tariff Policy: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया, जिससे हर भारतीय परिवार को इतने हजार का नुकसान हो सकता है!
Donald Trump Tariff Policy: प्रेसिडेंशियल चुनाव के दौरान ही डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह रेसिप्रोकल टैरिफ नीति को लागू करेंगे जब भी वह सरकार में आएंगे। चुनाव जीतने के बाद, उन्होंने “रेसिप्रोकल टैरिफ” की घोषणा की, जो 2 अप्रैल से कई देशों में लागू हो गई। इसके परिणामस्वरूप, अमेरिका अब विदेशी उत्पादों पर उसी तरह का टैरिफ लगाएगा जो वह देश अपने उत्पादों पर लगाता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत इस निर्णय से परेशान है। यह स्थिति कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती है, लेकिन भारत को राहत और अवसर दोनों मिल गए हैं। लेकिन प्रत्येक भारतीय परिवार को ट्रंप की टैरिफ नीति से हर साल कुछ हजार रुपये का नुकसान हो सकता है।
भारत में कितने परिवारों को नुकसान हो सकता है?
टैरिफ नीति का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीमित प्रभाव होगा। ट्रंप के टैरिफ बम से भारत की जीडीपी में केवल 0.19% की गिरावट हो सकती है, जो प्रति परिवार की सालाना आय में 2396 रुपये की गिरावट के बराबर होगी। इसका परिणाम यह है कि भारत की घरेलू मांग और वैश्विक निर्यात में उसकी सीमित (2.4 प्रतिशत) हिस्सेदारी है।
भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण व्यापार साझेदार है। भारत ने अप्रैल से फरवरी 2025 के बीच 395.63 अरब डॉलर मूल्य का सामान अमेरिका को भेजा है। कृषि उत्पादों, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स पर टैरिफ बढ़ने का असर जरूर पड़ेगा। इसे इस तरह समझिए कि भारत प्रत्येक वर्ष अमेरिका को 8 अरब डॉलर के कपड़े और 5 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात करता है। लेकिन बांग्लादेश और वियतनाम पर अधिक टैरिफ लगने से भारतीय उत्पादों की कीमत अपेक्षाकृत कम रहेगी और एक्सपोर्ट को नए अवसर मिल सकते हैं।
अच्छी स्थिति में है भारत
ट्रंप ने अपनी नवीनतम टैरिफ नीति में सभी देशों पर 10 प्रतिशत का बेस टैरिफ लगाया है, जिसमें भारत को 26 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। वहीं टैरिफ चीन पर 34%, वियतनाम पर 46%, बांग्लादेश पर 37% और यूरोपीय संघ पर 20% लागू होगा। अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान अब भी तुलनात्मक रूप से सस्ता रहेंगे, इसलिए भारत कंपीटिटिव देशों से बेहतर दिखता है।
स्टैगफ्लेशन का खतरा
वहीं, इन टैरिफ्स से अमेरिका में “स्टैगफ्लेशन” या महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास रुकने का खतरा है। इसके अलावा, दूसरे देश प्रतिक्रियावादी टैरिफ लगा सकते हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार युद्ध का कारण बन सकता है। इसलिए भारत को अब नई रणनीतियां बनाने और नए बाजार खोजने का समय है।
सरकार घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए जल्दी से डंपिंग रोकने और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर काम कर रही है। भारत अमेरिका, यूके और खाड़ी देशों के साथ अच्छी तरह से ट्रेड डील कर सकता है, तो टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों को बहुत फायदा हो सकता है।
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