नाबार्ड द्वारा लखनऊ में आयोजित “उत्तर प्रदेश के प्राथमिक क्षेत्रों में ऋण संभाव्यता” विषय पर राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह संगोष्ठी उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगी और राज्य को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी।
कार्यक्रम में राज्य फोकस पेपर 2026-27 का विमोचन किया गया, जिसमें कृषि, एमएसएमई, ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा और सेवा क्षेत्रों में ऋण विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। नाबार्ड के अधिकारियों ने बताया कि यह दस्तावेज बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा, ताकि प्राथमिक क्षेत्रों में निवेश और ऋण प्रवाह को बढ़ाया जा सके।
इस अवसर पर प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया गया, जिसमें विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और वित्तीय समावेशन से जुड़ी पहलों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में ग्रामीण उद्यमिता, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और स्टार्टअप्स से जुड़े कई प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि सही वित्तीय सहयोग से किस तरह जमीनी स्तर पर आर्थिक बदलाव संभव है।
वक्ताओं ने कहा कि यह क्रेडिट संगोष्ठी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के अनुरूप है, जिसके तहत भारत को वर्ष 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, उत्तर प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी। इसके लिए कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर में संतुलित विकास पर जोर दिया गया है।
नाबार्ड के प्रतिनिधियों ने बताया कि राज्य में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऋण प्रवाह बढ़ाना बेहद जरूरी है। छोटे और मध्यम किसानों, कुटीर उद्योगों, एमएसएमई और ग्रामीण उद्यमियों को सुलभ और समय पर वित्त उपलब्ध कराने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आय में वृद्धि होगी। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा, बल्कि राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक और नई वित्तीय तकनीकों के माध्यम से ऋण वितरण को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अपील की गई कि वे राज्य फोकस पेपर में दिए गए लक्ष्यों के अनुरूप अपनी ऋण योजनाएं तैयार करें और प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दें।
अंत में संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए नाबार्ड की सराहना की गई और इसे उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया। वक्ताओं ने संगोष्ठी के प्रति मंगलमय शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि यह पहल राज्य के आर्थिक लक्ष्य हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी।


