मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए माफी नीति 2025 के विस्तार को मंजूरी दे दी है। आवास और शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने मंगलवार को इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम राज्यभर में भूखंड आवंटन से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में एक अहम पहल है। नीति के विस्तार से विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आवंटित या नीलाम किए गए भूखंडों के चूककर्ता आवंटियों को अपनी संपत्तियों को नियमित कराने का एक और अवसर मिलेगा।
मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल ने आवास एवं शहरी विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित तथा नीलाम किए गए भूखंडों पर लागू माफी नीति 2025 को आगे बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत अब पात्र आवंटी 31 मार्च 2026 तक इस नीति के अंतर्गत आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन आवेदकों के आवेदन स्वीकृत होंगे, उन्हें संबंधित विकास प्राधिकरण से मंजूरी मिलने की तारीख से तीन महीने के भीतर देय राशि जमा करनी होगी।
हरदीप सिंह मुंडियन ने कहा कि यह निर्णय जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि कई परिवार, संस्थाएं और उद्यमी बकाया राशि, आर्थिक कठिनाइयों और प्रक्रियात्मक विलंब के कारण अपने भूखंडों से जुड़े मामलों को सुलझा नहीं पा रहे थे। नीति के विस्तार से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी और वे बिना अतिरिक्त दबाव के अपनी संपत्तियों को वैध और नियमित कर सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में एक जनहितैषी सोच का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जिन आवंटियों ने समय पर किश्तों का भुगतान नहीं किया या निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं कर पाए, उन्हें अब बकाया चुकाने और अतिरिक्त समय पाने का उचित अवसर दिया गया है। सरकार चाहती है कि लोग कानूनी विवादों में उलझने के बजाय समाधान की राह पर आगे बढ़ें।
माफी नीति 2025 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि बकाया राशि का भुगतान करने वाले आवंटियों को ब्याज सहित राशि एकमुश्त जमा करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन उन पर किसी प्रकार का अतिरिक्त जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा निर्माण से संबंधित शुल्कों में 50 प्रतिशत तक की छूट भी प्रदान की जाएगी, जिससे आवंटियों पर वित्तीय बोझ कम होगा।
आईटी सिटी एसएएस नगर और विकास प्राधिकरणों की अन्य योजनाओं के तहत आवंटित संस्थागत भूखंडों, अस्पताल स्थलों और औद्योगिक प्लॉट्स के मामलों में भी राहत के प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में आवंटन या नीलामी मूल्य का 2.5 प्रतिशत विस्तार शुल्क लिया जाएगा और आवंटन की शर्तों सहित निर्माण कार्य पूरा करने के लिए तीन वर्ष की अवधि दी जाएगी।
यह योजना उन आवंटियों पर लागू होगी जिन्होंने 31 दिसंबर 2013 के बाद देय किश्तों का भुगतान नहीं किया या तय समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा नहीं किया था। मंत्री ने सभी पात्र आवंटियों से अपील की कि वे विस्तारित अवधि का लाभ उठाएं और समय रहते आवेदन कर अपने मामलों का समाधान कराएं।
सरकार का मानना है कि माफी नीति 2025 के विस्तार से न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में शहरी विकास परियोजनाओं को भी गति मिलेगी और राजस्व संग्रह में सुधार होगा।


